गर्भावस्था के दौरान कई मेडिकल जांच और अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं, जो गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य, विकास और गर्भावस्था की प्रगति की निगरानी करने में मदद करते हैं। इन्हीं महत्वपूर्ण जांचों में से एक TIFFA स्कैन है।
TIFFA स्कैन शिशु के विकसित हो रहे अंगों और शारीरिक संरचनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी देता है। कई माता-पिता जानना चाहते हैं कि TIFFA स्कैन गर्भावस्था के किस सप्ताह में किया जाता है और इस स्कैन के दौरान किन चीजों की जांच की जाती है।
TIFFA का पूरा नाम Targeted Imaging for Foetal Anomalies है। यह गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में किया जाने वाला एक विस्तृत अल्ट्रासाउंड है। इसे आमतौर पर Level 2 Ultrasound या Anomaly Scan भी कहा जाता है।
शुरुआती गर्भावस्था में किए जाने वाले अल्ट्रासाउंड का उद्देश्य गर्भावस्था की पुष्टि, उसकी स्थिति और गर्भकाल का आकलन करना हो सकता है। वहीं, TIFFA स्कैन में गर्भ में विकसित हो रहे शिशु के शरीर और अंगों को अधिक विस्तार से देखा जाता है।
अल्ट्रासाउंड में उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों की मदद से तस्वीरें बनाई जाती हैं। इसमें एक्स-रे रेडिएशन का उपयोग नहीं होता।
TIFFA या मिड-प्रेग्नेंसी एनोमली स्कैन आमतौर पर गर्भावस्था के 18वें से 22वें सप्ताह के बीच किया जाता है।
हालांकि, इसकी सही टाइमिंग हर गर्भावस्था में अलग हो सकती है। गर्भावस्था की स्थिति और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ऑब्स्टेट्रिशियन या फीटल मेडिसिन विशेषज्ञ उचित समय निर्धारित कर सकते हैं।
इस अवधि तक शिशु के कई प्रमुख अंग और शारीरिक संरचनाएं इतनी विकसित हो चुकी होती हैं कि अल्ट्रासाउंड के माध्यम से उनका विस्तृत आकलन किया जा सके।
कभी-कभी शिशु की स्थिति ऐसी होती है कि पहली बार में सभी आवश्यक तस्वीरें नहीं मिल पातीं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर कुछ समय बाद दोबारा स्कैन करवाने की सलाह दे सकते हैं।
TIFFA स्कैन में शिशु के शरीर की विभिन्न संरचनाओं का व्यवस्थित रूप से आकलन किया जाता है।
इसमें डॉक्टर या सोनोलॉजिस्ट शिशु के सिर, मस्तिष्क, चेहरे, रीढ़ की हड्डी, छाती, हृदय, पेट, किडनी, ब्लैडर, हाथ और पैरों सहित कई महत्वपूर्ण अंगों को देखते हैं।
शिशु की ग्रोथ का आकलन करने के लिए सिर, पेट और कुछ लंबी हड्डियों का माप भी लिया जा सकता है।
इसके अलावा प्लेसेंटा और एमनियोटिक फ्लूइड की स्थिति भी देखी जाती है। चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्विक्स और गर्भावस्था से संबंधित अन्य संरचनाओं का भी आकलन किया जा सकता है।
TIFFA स्कैन में शिशु के हृदय की जांच भी महत्वपूर्ण होती है। अलग-अलग व्यू के माध्यम से हृदय की स्थिति, उसके चैंबर्स और प्रमुख संरचनाओं का यथासंभव आकलन किया जाता है।
TIFFA स्कैन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य शिशु में कुछ संरचनात्मक असामान्यताओं की स्क्रीनिंग करना है।
इसके माध्यम से मस्तिष्क, रीढ़, हृदय, किडनी, पेट की दीवार, हाथ-पैर और दूसरे अंगों से जुड़ी कुछ समस्याओं की पहचान की जा सकती है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि कोई भी अल्ट्रासाउंड हर प्रकार की समस्या का पता नहीं लगा सकता। कुछ स्थितियां अल्ट्रासाउंड में आसानी से दिखाई नहीं देतीं, जबकि कुछ समस्याएं गर्भावस्था के बाद के चरण में विकसित हो सकती हैं।
इसलिए सामान्य TIFFA रिपोर्ट गर्भावस्था के आकलन में महत्वपूर्ण होती है, लेकिन यह इस बात की पूर्ण गारंटी नहीं देती कि शिशु में कोई भी स्वास्थ्य या विकास संबंधी समस्या नहीं है।
यदि स्कैन में कोई असामान्य या संदिग्ध निष्कर्ष मिलता है, तो डॉक्टर अतिरिक्त अल्ट्रासाउंड, फीटल मेडिसिन विशेषज्ञ से परामर्श या अन्य जांचों की सलाह दे सकते हैं।
हां। NT Scan और TIFFA Scan अलग-अलग समय पर किए जाते हैं और इनके उद्देश्य भी अलग होते हैं।
NT यानी Nuchal Translucency Scan आमतौर पर गर्भावस्था के शुरुआती चरण में, लगभग 11 से 14 सप्ताह के बीच किया जाता है। इसमें शिशु की गर्दन के पीछे मौजूद तरल पदार्थ की मोटाई मापी जाती है। अन्य जांचों और जानकारी के साथ इसका उपयोग कुछ क्रोमोसोमल स्थितियों के जोखिम की स्क्रीनिंग के लिए किया जा सकता है।
दूसरी ओर, TIFFA स्कैन गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में किया जाता है और इसका मुख्य उद्देश्य शिशु की शारीरिक संरचना और विकसित हो रहे अंगों का विस्तृत आकलन करना है।
NT स्कैन सामान्य आने के बाद भी डॉक्टर TIFFA स्कैन करवाने की सलाह दे सकते हैं क्योंकि दोनों जांचों के उद्देश्य अलग हैं।
TIFFA स्कैन सामान्यतः पेट के माध्यम से किए जाने वाले अल्ट्रासाउंड की तरह किया जाता है। गर्भवती महिला को जांच वाली टेबल पर लेटाया जाता है और पेट पर अल्ट्रासाउंड जेल लगाया जाता है।
इसके बाद डॉक्टर या सोनोलॉजिस्ट अल्ट्रासाउंड प्रोब को पेट पर अलग-अलग दिशाओं में घुमाकर शिशु की आवश्यक तस्वीरें प्राप्त करते हैं।
यह सामान्य प्रेग्नेंसी अल्ट्रासाउंड की तुलना में अधिक समय ले सकता है क्योंकि इसमें शिशु के कई अंगों और संरचनाओं को विस्तार से देखना होता है।
स्कैन में लगने वाला समय शिशु की स्थिति, उसकी गतिविधियों और आवश्यक संरचनाओं की स्पष्टता सहित कई बातों पर निर्भर करता है।
तैयारी से जुड़े निर्देश गर्भावस्था के सप्ताह और डायग्नोस्टिक सेंटर के प्रोटोकॉल के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए अपॉइंटमेंट लेते समय दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए।
यदि पहले कोई प्रेग्नेंसी अल्ट्रासाउंड या अन्य संबंधित जांच हुई है, तो उनकी रिपोर्ट साथ ले जाना उपयोगी हो सकता है।
अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल गर्भावस्था के दौरान लंबे समय से किया जा रहा है। इसमें एक्स-रे या CT स्कैन की तरह आयोनाइजिंग रेडिएशन का उपयोग नहीं होता।
चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षित प्रोफेशनल द्वारा किया गया डायग्नोस्टिक अल्ट्रासाउंड प्रसवपूर्व जांच की स्थापित तकनीक है।
फिर भी, अल्ट्रासाउंड को चिकित्सकीय आवश्यकता और डॉक्टर की सलाह के अनुसार करवाना चाहिए, केवल शिशु की तस्वीरें या वीडियो प्राप्त करने के उद्देश्य से नहीं।
गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में निर्धारित समय पर TIFFA स्कैन करने से डॉक्टरों को शिशु के कई महत्वपूर्ण अंगों और संरचनाओं का उचित विकास चरण पर आकलन करने का अवसर मिलता है।
यदि स्कैन में किसी ऐसी स्थिति का पता चलता है जिसकी आगे जांच की आवश्यकता है, तो डॉक्टर समय रहते अतिरिक्त जांच और गर्भावस्था की आगे की देखभाल के बारे में सलाह दे सकते हैं।
Aarna Diagnostic Centre में डॉक्टर की सलाह के अनुसार TIFFA, Level 2 Ultrasound और अन्य प्रेग्नेंसी अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। गर्भावस्था में कौन-सा स्कैन कब करवाना चाहिए, इसका निर्णय व्यक्तिगत गर्भावस्था और डॉक्टर की सलाह के आधार पर होना चाहिए।
TIFFA या एनोमली स्कैन आमतौर पर गर्भावस्था के 18वें से 22वें सप्ताह के बीच किया जाता है। सही समय गर्भावस्था की स्थिति के आधार पर डॉक्टर निर्धारित कर सकते हैं।
इन शब्दों का आमतौर पर गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में किए जाने वाले विस्तृत अल्ट्रासाउंड के लिए उपयोग किया जाता है, जिसमें शिशु के अंगों और शारीरिक संरचनाओं का आकलन किया जाता है।
TIFFA स्कैन का उद्देश्य शिशु के विकास और स्वास्थ्य का चिकित्सकीय आकलन करना है, लिंग निर्धारण नहीं। भारत में गर्भस्थ शिशु का लिंग निर्धारित करना और बताना कानूनन प्रतिबंधित है।
किसी असामान्य या संदिग्ध निष्कर्ष का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि शिशु को निश्चित रूप से कोई समस्या है। डॉक्टर दोबारा अल्ट्रासाउंड, विशेषज्ञ की सलाह या अतिरिक्त जांच की सलाह दे सकते हैं।
शुरुआती अल्ट्रासाउंड और TIFFA स्कैन गर्भावस्था के अलग-अलग चरणों और पहलुओं का आकलन करते हैं। आपके लिए कौन-से स्कैन आवश्यक हैं, यह आपके ऑब्स्टेट्रिशियन आपकी व्यक्तिगत गर्भावस्था के आधार पर तय करेंगे।
Convenient Tests right at your Doorstep!
86, Kargi – Patel Nagar Bypass, near Palm City, Adarsh Vihar, Brahmanwala, Dehradun, Uttarakhand 248001
1, Maharani Bagh Lane, Ballupur Chowk, Ashirwad Enclave, Ballupur, Dehradun, Uttarakhand 248001
1, Chakrata Rd, near Rohan Motors, Selakui, Central Hope Town, Uttarakhand 248011
F-7, Haridwar Road Nehru Colony Dehradun, Uttarakhand 248001 India
Leave a Comment