ब्लड टेस्ट डॉक्टरों द्वारा शरीर के अंदर होने वाले बदलावों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समझने के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली जांचों में से एक है। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण टेस्ट TLC ब्लड टेस्ट है, जो खून में मौजूद सफेद रक्त कोशिकाओं यानी White Blood Cells (WBCs) की कुल संख्या बताता है।
TLC आमतौर पर Complete Blood Count (CBC) का हिस्सा होता है। हालांकि, बुखार, बार-बार संक्रमण या बिना किसी स्पष्ट कारण के थकान जैसे लक्षण होने पर डॉक्टर विशेष रूप से TLC के परिणामों पर ध्यान दे सकते हैं।
TLC का पूरा नाम Total Leukocyte Count है। Leukocytes को ही White Blood Cells या WBCs कहा जाता है।
यह टेस्ट खून की एक निश्चित मात्रा में मौजूद सफेद रक्त कोशिकाओं की कुल संख्या बताता है। ये कोशिकाएं मुख्य रूप से बोन मैरो में बनती हैं और रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में पहुंचती हैं।
सफेद रक्त कोशिकाएं शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये बैक्टीरिया, वायरस और अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों से लड़ने में शरीर की मदद करती हैं।
TLC सभी सफेद रक्त कोशिकाओं की कुल संख्या बताता है, लेकिन WBC कई प्रकार की होती हैं।
न्यूट्रोफिल (Neutrophils): ये विशेष रूप से कई प्रकार के बैक्टीरियल संक्रमणों से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
लिम्फोसाइट्स (Lymphocytes): ये शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण हैं। इनमें B Cells और T Cells शामिल होती हैं।
मोनोसाइट्स (Monocytes): ये क्षतिग्रस्त कोशिकाओं और सूक्ष्मजीवों को हटाने में मदद करती हैं।
इओसिनोफिल्स (Eosinophils): इनकी संख्या कुछ एलर्जी और परजीवी संक्रमणों में बढ़ सकती है।
बेसोफिल्स (Basophils): ये शरीर में सूजन और एलर्जी से जुड़ी प्रतिक्रियाओं में भूमिका निभाती हैं।
यदि डॉक्टर को अलग-अलग प्रकार की WBC का अनुपात जानना हो, तो DLC यानी Differential Leukocyte Count भी देखा जा सकता है।
डॉक्टर कई कारणों से TLC टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं। यह सामान्य स्वास्थ्य जांच का हिस्सा हो सकता है या तब करवाया जा सकता है जब मरीज में संक्रमण या प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी किसी समस्या के लक्षण दिखाई दें।
उदाहरण के लिए, लगातार या बिना स्पष्ट कारण के होने वाले बुखार की जांच के दौरान TLC महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है। संक्रमण होने पर शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या में बदलाव हो सकता है।
बार-बार संक्रमण होना, लगातार थकान, कमजोरी, सूजन या बिना कारण वजन कम होना जैसी स्थितियों में भी डॉक्टर TLC की जांच करवा सकते हैं।
कुछ बीमारियों या ऐसे उपचारों के दौरान भी TLC को नियमित रूप से मॉनिटर किया जा सकता है जो बोन मैरो और रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं।
हालांकि, केवल TLC के आधार पर किसी बीमारी के कारण की पुष्टि नहीं की जाती। डॉक्टर इसके परिणामों को अन्य जांचों और लक्षणों के साथ देखते हैं।
सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या सामान्य से अधिक होने की स्थिति को Leukocytosis कहा जाता है।
संक्रमण, विशेष रूप से कुछ बैक्टीरियल संक्रमण, TLC बढ़ने का एक सामान्य कारण हो सकते हैं। लेकिन हर बार बढ़ा हुआ TLC संक्रमण का ही संकेत नहीं होता।
सूजन, शारीरिक या मानसिक तनाव, कुछ दवाएं, धूम्रपान और शरीर के टिश्यू में चोट के कारण भी WBC की संख्या बढ़ सकती है।
कुछ मामलों में लगातार या बहुत अधिक बढ़ा हुआ TLC रक्त या बोन मैरो से संबंधित किसी विकार की ओर भी संकेत कर सकता है। इसलिए बढ़े हुए TLC का कारण डॉक्टर द्वारा अन्य जांचों और मरीज की स्थिति के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या सामान्य से कम होने को Leukopenia कहा जाता है।
कम TLC कुछ वायरल संक्रमणों, ऑटोइम्यून बीमारियों, बोन मैरो से जुड़ी समस्याओं, गंभीर संक्रमण, पोषक तत्वों की कमी या कुछ दवाओं और उपचारों के कारण हो सकता है।
उदाहरण के लिए, कीमोथेरेपी जैसे कुछ उपचार WBC की संख्या को प्रभावित कर सकते हैं।
यदि किसी विशेष प्रकार की सफेद रक्त कोशिका की संख्या कम हो, तो डॉक्टर DLC की जांच कर सकते हैं। न्यूट्रोफिल की संख्या कम होने को Neutropenia कहा जाता है। गंभीर न्यूट्रोपेनिया में कुछ संक्रमणों का खतरा बढ़ सकता है।
TLC की सामान्य सीमा अलग-अलग प्रयोगशालाओं में थोड़ी अलग हो सकती है क्योंकि जांच की तकनीक और रेफरेंस रेंज अलग हो सकती हैं।
वयस्कों में आमतौर पर लगभग 4,000 से 11,000 WBC प्रति माइक्रोलीटर रक्त को एक सामान्य रेफरेंस रेंज माना जाता है। हालांकि, अपनी रिपोर्ट में दी गई लैब रेफरेंस रेंज को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उम्र, गर्भावस्था और अन्य शारीरिक परिस्थितियों के अनुसार भी सामान्य स्तर अलग हो सकता है।
इसलिए केवल इंटरनेट पर उपलब्ध सामान्य आंकड़ों से अपनी TLC रिपोर्ट का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
TLC और DLC दोनों सफेद रक्त कोशिकाओं के बारे में जानकारी देते हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य अलग है।
TLC खून में मौजूद सभी सफेद रक्त कोशिकाओं की कुल संख्या बताता है।
वहीं, DLC न्यूट्रोफिल, लिम्फोसाइट्स, मोनोसाइट्स, इओसिनोफिल्स और बेसोफिल्स जैसे अलग-अलग प्रकार के WBC का अनुपात या संख्या बताता है।
दो लोगों का TLC लगभग समान हो सकता है, लेकिन उनके न्यूट्रोफिल और लिम्फोसाइट्स का अनुपात अलग हो सकता है। इसलिए कई स्थितियों में TLC और DLC को एक साथ देखना अधिक उपयोगी होता है।
TLC टेस्ट के लिए सामान्यतः बांह की नस से थोड़ी मात्रा में खून लिया जाता है। इसके बाद ब्लड सैंपल को लैब में भेजा जाता है, जहां विशेष उपकरणों की मदद से सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या मापी जाती है।
खून का नमूना लेने की प्रक्रिया आमतौर पर कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है। सुई लगने के दौरान थोड़ी चुभन महसूस हो सकती है।
सिर्फ TLC टेस्ट के लिए आमतौर पर फास्टिंग की आवश्यकता नहीं होती।
हालांकि, यदि TLC के साथ ब्लड ग्लूकोज, लिपिड प्रोफाइल या कोई अन्य जांच भी की जा रही है जिसके लिए फास्टिंग आवश्यक है, तो मरीज को डॉक्टर या डायग्नोस्टिक सेंटर द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए।
TLC का असामान्य परिणाम अपने आप किसी बीमारी की पुष्टि नहीं करता। हाल में हुआ संक्रमण, दवाएं, तनाव और कई दूसरी स्थितियां WBC की संख्या को प्रभावित कर सकती हैं।
आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर CBC दोबारा करवाने, DLC देखने, Peripheral Blood Smear या अन्य जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
Aarna Diagnostic Centre में TLC सहित विभिन्न ब्लड टेस्ट नियमित स्वास्थ्य जांच या डॉक्टर की सलाह के अनुसार किए जाते हैं। TLC रिपोर्ट को हमेशा लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और दूसरी जांचों के साथ किसी योग्य चिकित्सक से समझना चाहिए।
TLC में बदलाव संक्रमण का संकेत दे सकता है, लेकिन केवल इस टेस्ट से संक्रमण के प्रकार या उसके सही कारण की पुष्टि नहीं की जा सकती।
हां। CBC में सफेद रक्त कोशिकाओं की कुल संख्या यानी TLC भी शामिल होती है।
TLC संक्रमण, सूजन, तनाव, कुछ दवाओं या रक्त संबंधी विकारों सहित कई कारणों से बढ़ सकता है।
जरूरी नहीं। TLC कम होने के कई कारण हो सकते हैं। हालांकि, कुछ सफेद रक्त कोशिकाओं, विशेष रूप से न्यूट्रोफिल की संख्या बहुत कम होने पर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
सिर्फ TLC टेस्ट के लिए आमतौर पर फास्टिंग जरूरी नहीं होती। यदि इसके साथ दूसरी जांच भी हो रही है, तो डॉक्टर या लैब द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें।
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